भगवान श्रीराम
मर्यादा पुरुषोत्तम: अयोध्या के राजकुमार, जिन्होंने दिखाया कि धर्ममय जीवन कैसा होता है
श्रीराम, यानी रामचंद्र, भगवान विष्णु के सातवें अवतार और रामायण के नायक हैं। अयोध्या के राजकुमार होकर भी उन्होंने पिता का वचन निभाने के लिए चौदह वर्ष का वनवास स्वीकार किया, हनुमान की सहायता से रावण से सीता को छुड़ाया और ऐसा न्यायपूर्ण शासन किया कि 'रामराज्य' आज भी आदर्श राज्य का पर्याय है। उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में पूजा जाता है, और उनका नाम स्वयं एक मंत्र है।
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श्रीराम कौन हैं?
श्रीराम विष्णु के सातवें अवतार हैं, जिनका जन्म अयोध्या के इक्ष्वाकु या रघु वंश, यानी सूर्यवंश, में हुआ। उनकी कथा वाल्मीकि रामायण में है, जिसे परंपरा 'आदिकाव्य', यानी पहली कविता, कहती है और जो सात कांडों में है। विद्वान इसकी रचना ईसा पूर्व की अंतिम सहस्राब्दी की कई शताब्दियों में हुई मानते हैं, जबकि परंपरा राम को त्रेता युग में रखती है।
राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है, यानी पुरुषों में श्रेष्ठ, जिन्होंने कभी धर्म की मर्यादा नहीं लाँघी। वे आदर्श पुत्र हैं जो बिना शिकायत वनवास स्वीकार करते हैं, आदर्श भाई, पति, मित्र और राजा भी। फिर भी परंपरा उनके जीवन के कठिन निर्णयों को छिपाती नहीं, और भक्त व कवि सदियों से उन पर चिंतन करते आए हैं।
समय के साथ राम की उपासना परमेश्वर के रूप में होने लगी। गोस्वामी तुलसीदास का सोलहवीं सदी का अवधी ग्रंथ रामचरितमानस, जो वाल्मीकि पर आधारित है, राम को आरंभ से अंत तक मनुष्य-नायक नहीं, बल्कि परब्रह्म के रूप में प्रस्तुत करता है। तमिल में कंबन की, बांग्ला में कृत्तिवास की और संस्कृत में अध्यात्म रामायण जैसी क्षेत्रीय रामायणों की अपनी-अपनी विशेषताएँ हैं, और यह कथा थाईलैंड के रामकियेन और जावा के ककविन रामायण के रूप में दक्षिण-पूर्व एशिया तक फैली। उनके नामों में राघव और रघुनंदन (रघुकुल के), दाशरथि (दशरथ-पुत्र), सियावर (सीता के पति), कोदंडराम (कोदंड धनुषधारी) और रामलला (बालरूप राम) प्रमुख हैं।
श्रीराम का स्वरूप: हर प्रतीक का अर्थ
राम प्रायः धनुष-बाण लिए खड़े दिखाए जाते हैं, अक्सर सीता, लक्ष्मण और हनुमान के साथ, जिसे राम दरबार या राम पंचायतन कहते हैं।
- धनुष (कोदंड) और बाण
- धर्मात्माओं की रक्षा और धर्म के लिए कर्म करने का बल। उनका बाण कभी नहीं चूकता, जैसे उनका वचन कभी नहीं टूटता।
- पीठ पर तरकश
- तत्परता: वह रक्षक जो सदा तैयार है।
- श्याम वर्ण
- विष्णु का रंग, आकाश और वर्षा के बादल जैसा।
- मुकुट और राजसी आभूषण, या वल्कल वस्त्र
- अयोध्या के राजा के रूप में वे मुकुट धारण करते हैं; वनवासी के रूप में जटा और सादे वल्कल वस्त्रों में दिखते हैं। दोनों एक ही राम हैं, जिन्हें सुख-दुःख नहीं बदलते।
- उठा हुआ हाथ (अभय)
- 'डरो मत': जो भी शरण में आए, उसकी रक्षा का राम का वचन।
- बाईं ओर सीता
- उनकी शक्ति और अडिग सदाचार की मूर्ति। सीता और राम की पूजा सीताराम के रूप में साथ होती है।
- दाईं ओर लक्ष्मण
- समर्पित भ्रातृ-प्रेम और सेवा।
- चरणों में हनुमान
- हाथ जोड़े सामने बैठे आदर्श भक्त।
रामायण की प्रमुख कथाएँ
जन्म और बचपन। अयोध्या के राजा दशरथ को बहुत वर्षों तक संतान नहीं हुई, तो उन्होंने पुत्रकामेष्टि यज्ञ किया। रानी कौशल्या से राम, कैकेयी से भरत, और सुमित्रा से जुड़वाँ लक्ष्मण व शत्रुघ्न का जन्म हुआ। किशोरावस्था में राम ने महर्षि विश्वामित्र के यज्ञों की रक्षा की और अहल्या को शाप से मुक्त किया।
धनुष भंग। मिथिला में राजा जनक के दरबार में शर्त थी कि जो शिव का विशाल धनुष चढ़ा देगा, उसी से जनकनंदिनी सीता का विवाह होगा। राम ने धनुष चढ़ाया ही नहीं, तोड़ भी दिया, और सीता से उनका विवाह हुआ।
वनवास। राम के राज्याभिषेक की पूर्व संध्या पर रानी कैकेयी ने दशरथ से दो वर माँगे: भरत को राजगद्दी और राम को चौदह वर्ष का वनवास। पिता का वचन निभाने के लिए राम तुरंत सीता और लक्ष्मण के साथ वन चले गए। भरत ने राजगद्दी स्वीकार नहीं की और राम की पादुकाएँ सिंहासन पर रखकर केवल उनके प्रतिनिधि के रूप में राज चलाया।
सीता हरण। दंडकारण्य में लंका के राजा रावण ने सोने के मृग बने मारीच के छल से राम को दूर भेजा और सीता का हरण कर लिया। उन्हें बचाने में जटायु ने प्राण दे दिए। खोज के दौरान राम-लक्ष्मण का स्वागत भक्तिमती शबरी ने किया, और सुग्रीव तथा हनुमान से उनकी मित्रता हुई।
लंका का युद्ध। हनुमान ने सीता को खोजा, वानरों ने समुद्र पर सेतु बाँधा, और महायुद्ध में राम ने रावण का वध किया। सीता ने अग्नि-परीक्षा देकर अपनी पवित्रता सिद्ध की, और राम अयोध्या लौटकर राजा बने, जिससे रामराज्य की स्थापना हुई।
उत्तरकांड। अंतिम कांड बताता है कि लोकापवाद के आगे झुककर राम ने सीता का त्याग किया; सीता ने वाल्मीकि आश्रम में लव और कुश को जन्म दिया और अंत में अपनी माता पृथ्वी की गोद में समा गईं। बहुत से भक्त और तुलसीदास सहित बाद के कवि इस प्रसंग को अलग ढंग से कहते हैं या छोड़ देते हैं।
परिवार और साथी
राम के पिता दशरथ, माता कौशल्या और विमाताएँ कैकेयी और सुमित्रा हैं। उनकी पत्नी सीता, मिथिला के राजा जनक की पुत्री, हल चलाते समय धरती से मिली थीं और लक्ष्मी का रूप मानी जाती हैं। उनके भाई लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न प्रेम और निष्ठा के आदर्श हैं, और उनके पुत्र लव-कुश ने पहली बार उनके दरबार में रामायण गाई। उनके सबसे बड़े भक्त हनुमान हैं, और सुग्रीव, जांबवान तथा रावण के धर्मात्मा भाई विभीषण, जिन्हें राम ने लंका का राजा बनाया, उनके सहयोगी हैं। राम का अपना कोई वाहन नहीं है।
श्रीराम की पूजा-विधि
राम का नाम ही सबसे बड़ी साधना है। उत्तर भारत में 'राम-राम' आम अभिवादन है, 'जय सियाराम' भक्ति का जयघोष, और अंतिम यात्रा में 'राम नाम सत्य है' कहा जाता है। तेरह अक्षरों वाला मंत्र 'श्री राम जय राम जय जय राम' घरों और मंदिरों में जपा जाता है, और बुधकौशिक ऋषि का रामरक्षास्तोत्र रक्षा के लिए पढ़ा जाता है। परिवारों में रामचरितमानस का पाठ होता है, जिसमें चौबीस घंटे का अखंड रामायण पाठ भी शामिल है, और मंगलवार-शनिवार को सुंदरकांड पढ़ा जाता है।
राम को तुलसी-दल, पीले और लाल फूल, फल, खीर, पंचामृत और मिठाइयाँ चढ़ाई जाती हैं। राम की पूजा अक्सर हनुमान जी के साथ होती है, इसलिए मंगलवार राम-हनुमान पूजा के लिए लोकप्रिय दिन है। नीचे के श्लोक रामरक्षास्तोत्र से हैं और सबसे अधिक पढ़े जाने वाले श्लोकों में हैं।
दक्षिणे लक्ष्मणो यस्य वामे तु जनकात्मजा । पुरतो मारुतिर्यस्य तं वन्दे रघुनन्दनम् ॥
dakṣiṇe lakṣmaṇo yasya vāme tu janakātmajā | purato mārutir yasya taṃ vande raghunandanam ||
अर्थ: जिनकी दाईं ओर लक्ष्मण, बाईं ओर जनकनंदिनी सीता और सामने मारुति (हनुमान) हैं, उन रघुनंदन को मैं प्रणाम करता हूँ। (रामरक्षास्तोत्र, श्लोक 31)
लोकाभिरामं रणरङ्गधीरं राजीवनेत्रं रघुवंशनाथम् । कारुण्यरूपं करुणाकरं तं श्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये ॥
lokābhirāmaṃ raṇaraṅgadhīraṃ rājīvanetraṃ raghuvaṃśanātham | kāruṇyarūpaṃ karuṇākaraṃ taṃ śrīrāmacandraṃ śaraṇaṃ prapadye ||
अर्थ: जो संसार को आनंद देने वाले, रणभूमि में धीर, कमलनयन, रघुवंश के स्वामी, करुणा के स्वरूप और करुणा की खान हैं, उन श्रीरामचंद्र की मैं शरण लेता हूँ। (रामरक्षास्तोत्र, श्लोक 32)
रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे । रघुनाथाय नाथाय सीतायाः पतये नमः ॥
rāmāya rāmabhadrāya rāmacandrāya vedhase | raghunāthāya nāthāya sītāyāḥ pataye namaḥ ||
अर्थ: राम को, रामभद्र को, रामचंद्र को, सृष्टिकर्ता को, रघुनाथ को, सबके स्वामी और सीता के पति को नमस्कार। (रामरक्षास्तोत्र, श्लोक 27)
प्रमुख पर्व
राम का जन्मोत्सव राम नवमी चैत्र शुक्ल नवमी (मार्च-अप्रैल) को आता है और इसी दिन चैत्र नवरात्रि पूरी होती है। इस दिन रामायण या रामचरितमानस का पाठ होता है और रामलीलाएँ होती हैं; अयोध्या में श्रद्धालु सरयू में स्नान करते हैं और दोपहर में जन्मोत्सव मनाते हैं। मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी को विवाह पंचमी राम-सीता के विवाह का उत्सव है, जो विशेषकर अयोध्या और नेपाल के जनकपुर में मनाया जाता है।
शारदीय नवरात्रि में रामलीला का मंचन होता है, जो दशहरे (विजयादशमी) पर रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों के दहन के साथ पूरा होता है। यूनेस्को ने रामलीला परंपरा को अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता दी है। उत्तर भारत के बड़े भाग में दीपावली उस रात के रूप में मनाई जाती है जब अयोध्या ने दीप जलाकर राम का स्वागत किया था, और भरत मिलाप भाइयों के पुनर्मिलन की याद दिलाता है।
प्रसिद्ध मंदिर
सरयू तट पर बसी अयोध्या सात मोक्षदायिनी पुरियों में से एक है। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा हुई; इसका प्रबंधन श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट करता है, और पास ही हनुमानगढ़ी और कनक भवन हैं। तेलंगाना का भद्राचलम, जो संत-कवि भक्त रामदास से जुड़ा है, राम नवमी पर होने वाले सीताराम कल्याणम् के लिए प्रसिद्ध है। कुंभकोणम के रामस्वामी मंदिर के स्तंभों पर रामायण के दृश्य उकेरे गए हैं, ओरछा के राम राजा मंदिर में राम की पूजा राज करते राजा के रूप में होती है, और नासिक का कालाराम मंदिर पंचवटी में है, जहाँ राम ने वनवास का समय बिताया। चित्रकूट, केरल का त्रिप्रयार और जनकपुर का जानकी मंदिर भी प्रमुख तीर्थ हैं, और माना जाता है कि रामेश्वरम में राम ने लंका जाने से पहले शिव की पूजा की थी।
दर्शन और वैष्णव परंपराएँ
वैष्णवों के लिए राम स्वयं विष्णु हैं, और अनेक परंपराएँ उन्हें परब्रह्म मानकर पूजती हैं। चौदहवीं-पंद्रहवीं सदी के आचार्य रामानंद से जुड़ा रामानंदी संप्रदाय आज उत्तर भारत के सबसे बड़े संन्यासी संप्रदायों में है और सीताराम की उपासना करता है। दक्षिण के श्रीवैष्णव राम के प्रति गहरी श्रद्धा रखते हैं, और आलवारों ने उनके गीत गाए। अध्यात्म रामायण पूरी कथा को अद्वैत की दृष्टि से कहती है, जिसमें राम सर्वव्यापी आत्मा हैं। कबीर जैसे संतों ने 'राम' शब्द का प्रयोग निराकार ईश्वर के लिए किया, और तुलसीदास, भक्त रामदास, त्यागराज और समर्थ रामदास ने राम-भक्ति को दैनिक जीवन का अंग बना दिया।
राम की शिक्षा किसी सिद्धांत से अधिक एक उदाहरण है: वचन निभाओ, बड़ों का सम्मान करो, निर्बल की रक्षा करो, और निजी सुख से ऊपर धर्म को रखो। शैव परंपराएँ राम को शिव के महान भक्त के रूप में सम्मान देती हैं, और रामचरितमानस में स्वयं शिव पार्वती को रामकथा सुनाते हैं। करोड़ों लोगों के लिए 'राम' बस ईश्वर का नाम है।
इस पूजा और पाठ के लिए
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श्रद्धालुओं के प्रश्न
राम नवमी कब है?
चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को, जो प्रायः मार्च या अप्रैल में आती है। यह राम का जन्मदिन है और इसी दिन चैत्र नवरात्रि पूरी होती है।
राम को मर्यादा पुरुषोत्तम क्यों कहते हैं?
क्योंकि वे पुरुषों में श्रेष्ठ (पुरुषोत्तम) हैं जिन्होंने कभी धर्म की मर्यादा नहीं तोड़ी: पिता का वचन निभाने के लिए वनवास गए और न्याय से राज किया।
रामायण किसने लिखी?
संस्कृत रामायण महर्षि वाल्मीकि की रचना मानी जाती है। हिंदी में सबसे प्रसिद्ध रूप गोस्वामी तुलसीदास का अवधी में रचा रामचरितमानस (सोलहवीं सदी) है, और कंबन की तमिल रामायण जैसे अनेक क्षेत्रीय रूप भी हैं।
राम के भाई और पुत्र कौन हैं?
उनके भाई लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न हैं। सीता से उनके जुड़वाँ पुत्र लव और कुश हैं।
राम मंत्र कौन सा है?
सबसे प्रचलित मंत्र 'श्री राम जय राम जय जय राम' है। केवल 'राम' नाम का जप भी पूर्ण मंत्र माना जाता है, और रक्षा के लिए रामरक्षास्तोत्र का पाठ किया जाता है।
अयोध्या राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा कब हुई?
अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 को हुई।
स्रोत
- https://www.britannica.com/topic/Rama-Hindu-deity
- https://www.britannica.com/topic/Ramcharitmanas
- https://www.britannica.com/topic/Rama-Navami
- https://www.worldhistory.org/Rama/
- https://www.worldhistory.org/The_Ramayana/
- https://www.business-standard.com/india-news/ram-mandir-pran-pratishtha-view-date-timings-and-full-schedule-here-124011900530_1.html
- https://sa.wikisource.org/wiki/श्रीरामरक्षास्तोत्रम्
- https://commons.wikimedia.org/wiki/File:Ramapanchayan,_Raja_Ravi_Varma_(Lithograph).jpg
अंतिम शोध: 2026-10-29