मंत्र और आरती
मंत्र, स्तोत्र, चालीसा और आरती का संपूर्ण पाठ, अर्थ सहित।

अम्बे तू है जगदम्बे काली
नवरात्रि में गूँजने वाली माँ दुर्गा और माँ काली की भावपूर्ण आरती
'अम्बे तू है जगदम्बे काली' देवी की सबसे लोकप्रिय हिन्दी आरतियों में से है, जिसमें उन्हें अम्बा, जगदम्बा, काली और दुर्गा कहकर पुकारा गया है। एक टेक और चार छन्दों में उनके बल, मातृ-प्रेम और रक्षा का गान है। इसे मुख्यतः नवरात्रि, जगराते और शुक्रवार को, हर छन्द के बाद टेक के साथ एक बार गाया जाता है। इसके रचयिता अनिश्चित हैं।

गायत्री मन्त्र
बुद्धि को प्रकाशित करने वाला ऋग्वेद का महामन्त्र
गायत्री मन्त्र, जिसे सावित्री मन्त्र भी कहते हैं, ऋग्वेद के तीसरे मण्डल के 62वें सूक्त का दसवाँ मन्त्र है। इसके द्रष्टा ऋषि विश्वामित्र और देवता सविता हैं। इसमें परमात्मा के दिव्य तेज का ध्यान करते हुए प्रार्थना की गई है कि वह हमारी बुद्धि को सत्प्रेरणा दे। संध्यावंदन, यज्ञोपवीत संस्कार और नित्य जप में इसका पाठ होता है, प्रायः माला पर 108 बार।

हनुमान चालीसा
गोस्वामी तुलसीदास की चालीस चौपाइयों में श्रीराम के दूत का यशगान
हनुमान चालीसा गोस्वामी तुलसीदास (16वीं शताब्दी) द्वारा अवधी में रचित भक्ति-स्तोत्र है, जिसमें आरम्भ के दो दोहे, चालीस चौपाइयाँ और अन्त में एक दोहा है। इसमें हनुमानजी के बल, बुद्धि और रामभक्ति का गान है। करोड़ों श्रद्धालु इसका रोज़ पाठ करते हैं, विशेषकर मंगलवार और शनिवार को, एक, सात, ग्यारह या 108 बार।

जय गणेश देवा आरती
हर शुभ कार्य के आरम्भ में गाई जाने वाली विघ्नहर्ता की प्रिय आरती
'जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा' भगवान गणेश की सबसे लोकप्रिय हिन्दी आरती है। गणेशजी विघ्नहर्ता हैं और हर पूजा में सबसे पहले पूजे जाते हैं। पाँच छोटे छन्दों में इसमें उनके माता-पिता, एकदन्त रूप, मूषक-वाहन, प्रिय भोग और दयालुता का वर्णन है। अन्तिम छन्द में 'सूर श्याम' की छाप है, जिसके आधार पर इसे लोक में सूरदास से जोड़ा जाता है।

महामृत्युंजय मन्त्र
त्रिनेत्रधारी शिव से अमृत की प्रार्थना करने वाला ऋग्वेद का महामन्त्र
महामृत्युंजय मन्त्र, जिसे त्र्यम्बक मन्त्र या रुद्र मन्त्र भी कहते हैं, ऋग्वेद के सातवें मण्डल (7.59.12) का मन्त्र है। इसके ऋषि वसिष्ठ और देवता त्र्यम्बक रुद्र (शिव) हैं। इसमें प्रार्थना है कि जैसे पकी ककड़ी बेल से सहज छूट जाती है, वैसे ही हम मृत्यु से छूटें, पर अमृत से नहीं। आरोग्य, रक्षा और शान्ति के लिए इसका प्रायः 108 बार जप होता है।

ॐ जय जगदीश हरे
पं. श्रद्धाराम फिल्लौरी रचित भगवान विष्णु की सर्वाधिक लोकप्रिय आरती
'ॐ जय जगदीश हरे' भगवान विष्णु (जगदीश, अर्थात् जगत के स्वामी) की हिन्दी आरती है, जिसे पंजाब के पं. श्रद्धाराम फिल्लौरी ने लगभग 1870 में लिखा। पूजा के अन्त में दीप घुमाते समय गाई जाने वाली यह आरती लगभग हर देवता और अवसर पर इतनी गाई जाती है कि विद्वान इसे 'सार्वभौमिक आरती' कहते हैं। प्रायः इसे एक बार, हर छन्द के बाद टेक के साथ गाया जाता है।
ॐ जय शिव ओंकारा आरती
शिवजी की सबसे प्रिय आरती, जिसमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश एक हैं
'ॐ जय शिव ओंकारा' भगवान शिव की सबसे लोकप्रिय हिन्दी आरती है। इसमें शिव को ओंकार, यानी पवित्र प्रणव ॐ का स्वरूप कहा गया है और बताया गया है कि ब्रह्मा, विष्णु और सदाशिव ॐ में एक हैं। इसके आठ मूल छन्द 'स्वामी शिवानन्द' की छाप के साथ पूरे होते हैं; बहुत से परिवार कैलास, गंगा और काशी विश्वनाथ के चार छन्द और जोड़ते हैं। शिव-पूजा के अन्त में इसे एक बार गाया जाता है।

शिव ताण्डव स्तोत्रम्
शिव के प्रचण्ड नृत्य का स्तोत्र, जिसे परम्परा रावण की रचना मानती है
शिव ताण्डव स्तोत्र भगवान शिव के प्रचण्ड ताण्डव नृत्य की स्तुति में रचित 17 श्लोकों का संस्कृत स्तोत्र है। परम्परा इसे लंकापति रावण की रचना मानती है, जो शिव के परम भक्त थे। पंचचामर छन्द के कारण इसकी लय डमरू की थाप जैसी है। स्वयं स्तोत्र प्रदोष काल में शिव-पूजा के बाद इसका पाठ करने को कहता है।